मक्का रक्षा समझौता: पाकिस्तान, तुर्की और सऊदी अरब के सैन्य गठबंधन से बढ़ी भारत की चिंता
सऊदी अरब, तुर्की और पाकिस्तान के बीच हुए नए रक्षा समझौते ने रणनीतिक हलकों में चर्चा छेड़ दी है। समझौते के तहत, किसी एक पर हमला तीनों पर हमला माना जाएगा, जिससे भारत-पाकिस्तान के बीच भविष्य के किसी भी सैन्य संघर्ष के समीकरण जटिल होने की आशंका है।
सऊदी अरब के मक्का में हाल ही में सऊदी अरब, तुर्की और पाकिस्तान ने एक त्रिपक्षीय रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। इस समझौते के मुताबिक, इन देशों में से किसी एक पर हमला होने की स्थिति में तीनों देश सामूहिक रूप से जवाब देंगे। इस गठबंधन को लेकर विशेषज्ञों का मानना है कि यह भारत के लिए चिंता का विषय हो सकता है, क्योंकि भारत के पाकिस्तान और तुर्की के साथ संबंध सामान्य नहीं हैं।
रक्षा विशेषज्ञ ब्रह्मा चेलानी का कहना है कि भविष्य में यदि भारत पाकिस्तान में किसी सैन्य ठिकाने पर दंडात्मक कार्रवाई करता है, तो इस्लामाबाद इसे युद्ध मानकर समझौते के तहत सामूहिक रक्षा की मांग कर सकता है। हालांकि, तुर्की के राष्ट्रपति रेचेप तैयप्प अर्दोआन ने स्पष्ट किया है कि यह समझौता किसी देश को निशाना बनाने के लिए नहीं, बल्कि आपसी सुरक्षा, आतंकवाद से निपटने और क्षेत्रीय स्थिरता के लिए है। विश्लेषकों का यह भी मानना है कि इस समझौते का अर्थ यह नहीं है कि ये देश सीधे तौर पर किसी युद्ध में कूद पड़ेंगे, लेकिन यह पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कूटनीतिक और सैन्य समर्थन देने की एक नई व्यवस्था जरूर बन सकता है। वहीं, सऊदी अरब के साथ भारत के गहरे आर्थिक और ऊर्जा संबंध बने हुए हैं, जिसके चलते इस समझौते का भारत-सऊदी द्विपक्षीय संबंधों पर सीधा असर पड़ने की संभावना कम है।
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